Health Tips: विंध्य क्षेत्र में आज भी कई ऐसी प्राकृतिक औषधियां मौजूद हैं, जिनका उपयोग सदियों से किया जा रहा है. इन्हीं में से एक है गोखरू का पौधा, जिसे कई स्थानों पर अंधा शीश का पेड़ या छोटा धतूरा भी कहा जाता है. यह पौधा आमतौर पर सड़क किनारे, पथरीली और बंजर जमीन पर खरपतवार की तरह अपने आप उग जाता है लेकिन औषधीय गुणों के मामले में इसे किसी खजाने से कम नहीं माना जाता. सीधी के आयुर्वेद चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने कहा कि यह पौधा वात, पित्त और कफ तीनों दोषों को संतुलित करने में सहायक होता है. गोखरू का तना और फल औषधीय तत्वों से भरपूर होते हैं और कई गंभीर रोगों के उपचार में इसका उपयोग किया जाता है. वर्तमान समय में गोखरू का उपयोग बॉडी मसल्स बढ़ाने वाले पाउडर, मूत्र और जननांग संबंधी समस्याओं और गुर्दे की पथरी के इलाज में प्रभावी रूप से किया जा रहा है. यह पौधा बीपी और शुगर को नियंत्रित करने में भी मदद करता है. गोखरू में पाए जाने वाले तत्व खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं, जिससे हृदय संबंधी रोगों का खतरा घटता है.
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